पवित्र आत्मा से देह की क्रियाओं को कैसे मारे? | How to kill the actions of the body with the Holy Spirit?

एक ईसाई के लिए, एक बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि वह आत्मा में शक्तिशाली होना चाहिए। हम एक शक्तिशाली आध्यात्मिक मसीही कैसे हो सकते हैं। इसके लिए, हमें अपनी आत्मा को परमेश्वर के वचन से खिलाना होगा और हमें पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के अनुसार कार्य करना चाहिए। हमें मज़बूत फैसले लेने होंगे जो हमारी भावना का समर्थन करें। इस विषय पर केवल आज हम बात करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि यह हमारे सभी पाठकों के लिए उपयोगी होगा। प्रभु यीशु आपको आशीर्वाद दें।

आत्मा से देह की क्रियाओं को कैसे मारे
                                              आत्मा से देह की क्रियाओं को कैसे मारे

पवित्र आत्मा से देह की क्रियाओं को कैसे मारे?

सवाल : देह की क्रिया क्या है?
जवाब : क्रोध , विरोध , फुट , विरोध , डाह , मतवालापन , टोन्हा और इन के जैसे और और काम|

सवाल : इन कामो को कैसे मारें ?
जवाब : आत्मा से , आत्मा से , आत्मा से, जितनी बार आप पूछोगे कि कैसे, उतनी बार जवाब है आत्मा से सिर्फ आत्मा से|

सवाल :ये आत्मा कहाँ से लाये ?
जवाब : प्रभु यीशु के द्वारा |

सवाल : प्रभु यीशु जगत में क्यों आये ?
जवाब : यूहन्ना बप्तिस्मादाता कहता है ये परमेश्वर का मेमना है जो जगत के पापों को उठा ले जाता है|

सवाल : ये मेमना किसका है ?
जवाब: परमेश्वर का|

सवाल : इसे पाप उठाने किसने भेजा?
जवाब: परमेश्वर ने

यीशु ने हमारे पापों की कीमत चुकाई

एक बार यीशु कहते है कि ये कटोरा मेरे सामने से हटा लें, पर पिता ये नही करते| यीशु जी को ये ना चाहते हुए भी, ये कटोरा, (ये काम) करना ही पड़ा| पिता ने सामर्थ तो दी, पर पाप उठाने और दाम चुकाने के काम को यीशु को ही करना पड़ा|

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सुसमाचार क्या है ?

क्या आप ने कभी कहा था कि यीशु मेरे लिए क्रूस पर, मेरे पापों के लिए दाम चुकाओ| नही कभी नही| ये तो, यीशु मेरे और मेरे बापदादों के पेदा होने से भी पहले कर के चला गया था| मुझे तो बस एक दिन पता चला, किसी ने बताया कि मेरे सारे गुनाह कोई उठा कर ले गया वो चोर की तरह आया और बिना कुछ पता चले बिना, वो काम कर के चला गया| जो पिता ने उसे करने भेजा था| इस में मेरा कुछ नही, ये सब पिता की मर्जी थी| उसी का प्लान था| उसी का सारा इंतजाम था| इस बात से बहूत खुशी हुई, इसलिए इसे सुसमाचार कहते है,

पवित्र आत्मा और आग का बपतिस्मा क्या है ?

प्रश्न :- स्वम प्रभु क्या करना चाहते थे?
उत्तर :- लूका 12: 49 के अनुसार, यीशु ने कहा कि मैं पृथ्वी पर आग लगाने आया हूं और क्या चाहता हूं केवल यह कि अभी सुलग जाती! यीशु ये आग कहाँ लगाना चाहता था? यीशु के विषय में यूहन्ना बप्तिस्मादाता ने कहा था कि (मत्ती 3: 11) मैं तो पानी से तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूं, परन्तु जो मेरे बाद आनेवाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा। ये यीशु के करने का काम था| यीशु की मर्जी थी| किन लोगों ने यीशु से पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा प्राप्त किया? केवल उन्होने, जिनका ध्यान यीशु पर था, उन्हें प्रभु पवित्र आत्मा देते है| यूहन्ना 20: 22 के अनुसार, यह कहकर उस ने, उन पर फूंका और उन से कहा, पवित्रा आत्मा लो।

फिर प्रेरितों के काम 2: 3 में आग का बपतिस्मा दिया, और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं। पवित्र आत्मा {तेल} + उसकी सामर्थ {आग}| शक्तिशाली मसीही वो ही है, जिस ने यीशु से पवित्र आत्मा और आग का बपतिस्मा पाया है| तेल पवित्र आत्मा का प्रतिक है और आग सामर्थ का| जब तक तेल मशाल में रहता है, तो थोड़ी सी आग से वो मशाल या दीपक जल उठता है: और वो आग तब तक जलती रहती है, जब तक उस मे तेल बना रहता है| इसी प्रकार प्रभु ने यूहन्ना में चेलो को पवित्र आत्मा दिया और प्रेरितों में आग से उसे प्रज्वलित कर दिया और फिर वो येशु की सेवा में लग गए|

चेलों के जीवन में भी बहूत सी चनौतियाँ थी, पर प्रभु ने उन्हें पवित्र आत्मा में: फिर आग से बपतिस्मा दिया और उन्होंने अपने शरीर की क्रियाओं को आत्मा की सामर्थ से मार दिया दिया|

बपतिस्मा कितने प्रकार का है?

  1. पानी का बपतिस्मा :- पापों की क्षमा
  2. पवित्र आत्मा का बपतिस्मा :- तेल से अभिषेक प्रभु की सामर्थ को ग्रहण करने की योग्यता
  3. आग का बपतिस्मा :- प्रभु की सामर्थ का प्रकटीकरण

ये तीनो बपतिस्मा लेने के बाद, एक सामर्थवान मसीही बनता है| एक समर्थही मसीही, आत्मा से शरीर की क्रियाओं को मार सकता है|

हम कैसे करें?

पहले शरीर के किसी काम को लक्ष्य बना कर, उसे आत्मा के द्वारा मारो| यीशु आत्मा के द्वारा सहायता देंगे| उस ने पवित्र वचन में कहा (लूका 11: 9)
“और मैं तुम से कहता हूं; कि मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ों तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा।” (लूका 11: 10) “क्योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है; और जो ढूंढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा।” (लूका 11: 11) तुम में से ऐसा कौन पिता होगा, कि जब उसका पुत्रा रोटी मांगे, तो उसे पत्थर दे: या मछली मांगे, तो मछली के बदले उसे सांप दे? (लूका 11: 12) या अण्डा मांगे तो उसे बिच्छू दे? (लूका 11: 13) सो जब तुम बुरे होकर अपने लड़केबालों को अच्छी वस्तुऐ देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने मांगनेवालों को पवित्रा आत्मा क्यों न देगा।। प्रभु की तीव्र इच्छा है; कि वो आपको पवित्रात्मा और आग से बपतिस्मा दे|

कितनी आत्मिक तरक्की करें?

इतनी कि हम भी हनोक की तरह, एलिय्याह की तरह और यीशु की तरह जीवित स्वर्ग तक उठा लिए जाये | ये सभी जीवित ही स्वर्ग तक उठा लिए गए| फिर पौलुस कहता है कि वो एक ऐसे व्यक्ति को जनता है जो जीवित ही तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया| जब तक हम इन के स्तर तक न पहुँचे हमें कार्य करने की जरूरत सदा रहेगी| प्रभु यीशु आपको आशीष दे | आप सबको जय मसीह की | आमीन |

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